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Wednesday, January 21, 2026
HomeUncategorizedसीयूएसबी में कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों पर विचार मंथन कार्यशाला

सीयूएसबी में कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों पर विचार मंथन कार्यशाला

गया।दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कृषि संकाय द्वारा “कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों पर विचार मंथन” विषय पट आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गई |  जन सम्पर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य कृषि और सम्बद्ध क्षेत्रों में नवीनतम नवाचार, विकास और चुनौतियों पर चर्चा करना  और उन्हें विश्वविद्यालय स्तर पर लागू करना था  । कार्यशाला में कृषि में रोजगार विषयों का क्षेत्र, परास्नातक मुख्य विषयों की संरचना एवं रूपरेखा की संभावनाओं पर विचार किया गया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति, प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि “ऋषि और कृषि” इस देश की प्राथमिकता रही है। बदलते जलवायु को ध्यान में रखते हुए हमें कृषि में अधिक शोध करने की आवश्यकता है। प्रो. सिंह ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए नए और उन्नत कृषि पद्धतियों पर शोध करने का आह्वान किया।उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों से कृषि विभाग में पंजीकृत विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें कृषि के सभी पहलुओं को गहराई से समझने की जरूरत है। प्रो. सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि कृषि में नवाचार और स्थिरता के लिए युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है और इस दिशा में विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा।

मुख्य अतिथि प्रो. रामेश्वर सिंह, पूर्व कुलपति, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना ने अपने भाषण में कहा कि कृषि क्षेत्र में सुधार और विकास के लिए नवीनतम तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधानों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों की प्रशंसा  करते हुए कहा सभी गतिविधियां, विशेषकर कृषि एवं विकास पीठ का खुलना, इस क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित होगा। उन्होंने यह भी जोर दिया कि किसानों को नई तकनीकों और ज्ञान के साथ सशक्त बनाना चाहिए ताकि वे अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ा सकें और अधिक लाभ कमा सकें।

डॉ. पी. के. सिंह (कार्यक्रम सचिव) ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं कृषि क्षेत्र में नई दिशाओं और संभावनाओं की खोज के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती हैं। कार्यशाला के माध्यम से प्राप्त सुझाव और विचार विश्वविद्यालय के कृषि संकाय की शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाने में सहायक होंगे।

विभाग के अध्यक्ष डॉ. आर. ए. यादव ने अपने वक्तव्य में कहा कि कृषि और पशु विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों क्षेत्रों में समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से विभिन्न विभागों और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे कृषि और पशु विज्ञान दोनों क्षेत्रों में नवाचार और विकास संभव होगा।

डॉ. हेमंत कुमार सिंह (सहायक प्राध्यापक, कृषि विभाग) ने कार्यशाला का मंच संचालन किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से छात्रों और शोधकर्ताओं को विभिन्न कृषि और सम्बद्ध क्षेत्रों में नवीनतम विकास और अनुसंधान के बारे में जानकारी प्राप्त हुई।

इस कार्यशाला में विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया जिसमें कृषि विज्ञान, पशु विज्ञान, उद्यान विज्ञान, और अन्य सम्बद्ध क्षेत्रों के विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने जैविक खेती, जल संसाधन प्रबंधन, फसल उत्पादन तकनीक, पशुधन प्रबंधन, और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। इस कार्यशाला में प्रतिभागियों ने कृषि क्षेत्र में नवाचार और सतत विकास के लिए आवश्यक रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। कार्यशाला के समापन सत्र में, डॉ. प्रणव त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

कार्यशाला में प्रो. आर. के. सिंह, ओएसडी; डॉ. शांतिगोपाल  पाइन , सीईओ, सीयूएसबी; डॉ. आर. पी. सिंह, प्राध्यापक; डॉ. डी. वी. सिंह, प्राध्यापक; डॉ. प्रफुल्ल सिंह, प्राध्यापक; डॉ. गौतम कुमार, सहायक प्राध्यापक; डॉ. विकल केआर सिंह, सहायक प्राध्यापक; डॉ. बेरा, सहायक प्राध्यापक; एवं विश्वविद्यालय के अन्य कर्मी तथा कृषि छात्र उपस्थित थे।

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