गयाजी।दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के शिक्षा संकाय के शिक्षक शिक्षा विभाग ने कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की पांचवीं वर्षगांठ पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया | कुलपति प्रो के. एन. सिंह ने अपने संदेश में आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि 29 जुलाई 2025, वर्ष 2020 लागू हुए इस नीति के पाँच परिवर्तनकारी वर्षों का प्रतीक है। शिक्षक शिक्षा विभाग के डीन और अध्यक्ष में नेतृत्व में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में शिक्षक शिक्षा और भारत में व्यापक शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र पर इस नीति के प्रभाव पर प्रकाश डाला गया। जन सम्पर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि इस स्मारक कार्यक्रम में शिक्षक शिक्षा विभाग के संकाय सदस्य, स्नातकोत्तर छात्र, शोध विद्वान और अन्य विभाग के संकाय सदस्य एनईपी 2020 की उपलब्धियों और भविष्य की दिशाओं पर विचार करने के लिए एक साथ आए। औपचारिक उद्घाटन के पश्चात प्रोफेसर रवि कांत, डीन और विभागाध्यक्ष, शिक्षक शिक्षा विभाग ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने भविष्य के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के तरीके को मौलिक रूप से बदल दिया है। हम सीयूएसबी में अपने शैक्षिक कार्यक्रमों में प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षण, व्यावहारिक शिक्षा, बहु-विषयक दृष्टिकोण और समग्र मूल्यांकन को जोड़कर इसके मिशन को अपना चुके हैं। उन्होंने एनईपी 2020 को अमल में लाते समय आने वाली समस्याओं के बारे में भी बात की और उनसे निपटने के लिए कुछ विचार दिए। इन परिवर्तनों में चार वर्षीय एकीकृत बैचलर ऑफ एजुकेशन प्रोग्राम बनाना, शिक्षण कौशल, व्यक्तिगत विकास को प्रोत्साहित करना, ट्रांसडिसिप्लिनरी लर्निंग पर ध्यान केंद्रित करना और शिक्षकों को निरंतर व्यावसायिक विकास के अवसर प्रदान करना शामिल है। पीजी छात्रों और शोध विद्वानों ने देखा कि कक्षाओं में प्रौद्योगिकी का उपयोग कैसे किया जाता है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बाद शिक्षण और सीखने के नए तरीकों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एनईपी 2020 ने अनुकूलन, ट्रांसडिसिप्लिनरी शिक्षा और क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए सभी स्तरों पर शिक्षा में बड़े सुधार किए हैं। गौरतलब है कि सीयूएसबी में शिक्षक शिक्षा विभाग रचनात्मक शिक्षण विधियों का उपयोग करके, समुदाय को शामिल करके और समावेशी शिक्षा विधियों पर शोध करके इन परिवर्तनों को सक्रिय रूप से वास्तविकता में ला रहा है। कार्यक्रम का संचालन डीटीई की शोधार्थी सुश्री सृष्टि ने किया और कार्यक्रम की कार्यवाही का प्रबंधन किया। एनईपी प्रकोष्ठ के समन्वयक एवं सदस्य सचिव डॉ. मोजम्मिल हसन, सहायक प्राध्यापक, डीटीई ने कार्यक्रम का सारांश प्रस्तुत किया।चर्चा सत्र में संकाय सदस्य डॉ. मितांजलि साहू, डॉ. प्रज्ञा गुप्ता, डॉ. किशोर कुमार, डॉ. एन.वी. सिंह ने भाग लिया। विभाग के एनईपी प्रकोष्ठ ने इस संगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम के अंत में सह-समन्वयक डॉ. समरेश भारती, सहायक प्राध्यापक, डीटीई ने धन्यवाद ज्ञापन किया।












