Wednesday, March 4, 2026
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गया कॉलेज में “विकसित भारत 2047” हेतु नवाचार और उद्यमिता पर केन्द्रित दो शैक्षणिक सत्रों का आयोजन

गयाजी।गया कॉलेज के प्रबंधन विभाग में मंगलवार को ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए दो महत्त्वपूर्ण शैक्षणिक सत्रों का आयोजन एमबीए सभागार में किया गया। यह आयोजन आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) एवं सामरिक प्रशिक्षक एवं परामर्शदाता संघ (एसटीएमए) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, दक्षता और स्व-रोजगार के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था।

पूरे कार्यक्रम की अध्यक्षता गया कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) सतीश सिंह चंद्र ने की, जिन्होंने अपने प्रेरणादायी वक्तव्य में कहा कि भारत का भविष्य युवाओं की आत्मनिर्भरता और नवाचार पर आधारित होगा। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे नौकरी पाने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का संकल्प लें।

पहले सत्र में “लीन प्रबंधन कार्यशाला” का आयोजन राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद, पटना की कार्यान्वयन संस्था के सहयोग से किया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने लीन प्रबंधन की अवधारणाओं – जैसे उत्पादन क्षमता वृद्धि, संसाधनों का कुशल उपयोग एवं लागत न्यूनिकरण – पर आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।

दूसरे सत्र के रूप में “विकसित भारत 2047 हेतु उद्यमिता एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें सामरिक प्रशिक्षक एवं परामर्शदाता संघ (एसटीएमए) के निदेशक संजय कुमार की विशेष भूमिका रही।

इस सत्र में प्रमुख वक्ता के रूप में ‘प्रमोद लड्डू भंडार’ के संस्थापक श्री प्रमोद भदानी उपस्थित थे।
उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों, निरंतर परिश्रम एवं समर्पण से अर्जित सफलता की प्रेरणादायक यात्रा को बड़ी ही विस्तारपूर्वक साझा किया। उनके अनुभवों ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान का समुचित उपयोग कर भी एक सशक्त और समृद्ध उद्यम खड़ा किया जा सकता है। उनके वक्तव्य से छात्र-छात्राओं को विशेष प्रेरणा मिली और उनमें स्व-रोजगार के प्रति उत्साह का संचार हुआ।

अन्य वक्ताओं में अनुराग पोद्दार (प्रबंध निदेशक – पोद्दार समाधान प्राइवेट लिमिटेड), प्रेम नारायण पटवा (उपाध्यक्ष – बिहार उद्योग संघ), संजय कुमार (निदेशक – एसटीएमए), डॉ. निलेश नारायण (निदेशक – एसटीएमए), ए. के. वर्मा (एसटीएमए) तथा अभियंता एम. के. दास (निदेशक – एसटीएमए) शामिल रहे, जिन्होंने उद्यम आरंभ मॉडल, पूंजी प्रबंधन, सरकारी योजनाओं के लाभकारी उपयोग तथा नवाचार आधारित उद्यमिता पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए।

दिनभर चले इन दोनों सत्रों में व्यवसाय प्रबंधन, संगणक अनुप्रयोग तथा अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता दिखाई। उन्हें औद्योगिक विशेषज्ञों से प्रत्यक्ष संवाद का अवसर मिला, जिससे उनके व्यावसायिक दृष्टिकोण में न केवल व्यापकता आई, बल्कि नवाचार, दक्षता एवं उद्यमिता की व्यावहारिक समझ भी विकसित हुई।

कार्यक्रम का समापन प्रबंधन विभाग के प्रेमपति चखैयार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
इस अवसर पर आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. अरुण गर्ग, प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. अम्बरीष नारायण, संगणक अनुप्रयोग विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार सुमन, शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय धीरज, आईटी विभागाध्यक्ष डॉ. हर्ष वर्धन, डॉ. अमित कुमार, अमृता सिन्हा, अजीत राज, दीपचंद गुप्ता, सुजीत पाठक सहित अनेक प्राध्यापकगण भी उपस्थित रहे।

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