गयाजी।शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं और मूल्यांकन विधियों को सुदृढ़ बनाकर विविध श्रेणियों के शिक्षार्थियों के लिए समावेशन और प्रभावशीलता को बढ़ावा देने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की परिवर्तनकारी भूमिका है। अन्य क्षेत्रों की तरह, शिक्षण और अधिगम में भी एआई के अनेक उपयोगी अनुप्रयोग हैं, और अपनी आवश्यकता के अनुरूप इसे अपनाने का यह उपयुक्त समय है। उक्त वक्तव्य नाइजीरिया स्थित हेन्सार्ड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. दिलीप कुमार एम. ने दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कंप्यूटर साइंस विभाग द्वारा आयोजित विशेष अतिथि व्याख्यान के दौरान दिया।
मलेशिया के सेगी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय शोध फेलो प्रो. दिलीप कुमार एम. ने ‘ह्यूमन प्लस एआई इन एजुकेशन: इनफाइनाइट पॉसिबिलिटीज इन लैंग्वेज एप डेवलपमेंट’ शीर्षक पर आने विचारोत्तेजक व्याख्यान में एआई और पठन – पाठन में इसकी उपयोगिता के कई आयामों को साझा किया । उन्होंने क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करने के लिए भोजपुरी भाषा में एआई-आधारित भाषा ऐप विकास पर भी विशेष बल दिया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सीयूएसबी के कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा ने विज्ञान, कला तथा भूगोल जैसे सहवर्ती विषयों सहित अनेक अनुशासनों में एआई के दूरगामी प्रभावों को रेखांकित किया।
कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में कंप्यूटर विज्ञान विभाग द्वारा ‘रेस्पोंसिबल एंड इंक्लूसिव एआई’ विषय पर यह कार्यशाला माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा आगामी 19–20 फरवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में प्रस्तावित इंडिया-एआई समिट 2026 के पूर्व-कार्यक्रम के रूप में आयोजित की गई। उद्घाटन सत्र की शुरुआत प्रो. प्रभात रंजन, संयोजक एवं विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर विज्ञान, सीयूएसबी के स्वागत संबोधन से हुई | इसके पश्चात सह-संयोजक डॉ. जयनाथ यादव, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर विज्ञान द्वारा अतिथि वक्ता का औपचारिक परिचय प्रस्तुत किया गया।
जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम का समापन मुख्य वक्ता, कंप्यूटर विज्ञान के संकाय सदस्यों तथा गणित, सांख्यिकी और कंप्यूटर विज्ञान विद्यालय के शोधार्थियों के साथ एक प्रेरक मंथन सत्र के साथ हुआ, जिसने अकादमिक अन्वेषण और नवाचार की सहयोगी भावना को और सुदृढ़ किया। इस दौरान मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों का अन्वेषण किया गया तथा भारत और विदेशों में उनकी वर्तमान आवश्यकताओं पर चर्चा हुई। अतिथि वक्ता ने विद्यार्थियों को भारत एवं विदेशों में भविष्य की नौकरी संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी। कार्यक्रम का सफल संचालन समन्वयक डॉ. पियूष कुमार सिंह तथा सह-समन्वयक डॉ. मृत्युंजय सिंह और डॉ. प्रकाश कुमार द्वारा किया गया। अंत में सह-संयोजक डॉ. नेमी चंद्र राठौर, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर विज्ञान ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।












