पटना।विकास भवन के मदन मोहन झा कक्ष में शिक्षा विभाग द्वारा बैठक बुलाई गई जिसकी अध्यक्षता शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने की उनके साथ प्राइमरी डायरेक्टर एवं शिक्षा सचिव उपस्थित थे।
इस मीटिंग में एसोसिएशन से जुड़े बिहार के 38 जिला के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने मकरसंक्रांति के इस महत्वपूर्ण पर्व में भी इस मीटिंग में आकर यह साबित कर दिया है के विद्यालय संचालकों के लिए सबसे बड़ा पर्व और धर्म उनके यहां पढ़ रहे बच्चे है और इन बच्चों के लिए इनके हृदय में कितना दर्द है और सरकार निजी विद्यालयों और छात्रों के कष्ट को समझने को भी तैयार नहीं।
इसी संदर्भ में प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन ने बिहार सरकार एवं शिक्षा विभाग का ध्यान निजी विद्यालयों और RTE (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के अंतर्गत पढ़ रहे लाखों गरीब बच्चों की गंभीर समस्याओं की ओर आकृष्ट किया है।
प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सैयद शमायल अहमद ने कहा कि बिहार में निजी विद्यालय वर्षों से सरकार की शैक्षणिक व्यवस्था में सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश 2017–18 से 2025–26 तक RTE प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान अधूरा या पूरी तरह लंबित है। इसके कारण सैकड़ों विद्यालय बंद हो चुके हैं और अनेक विद्यालय बंद होने की कगार पर हैं, जिसका सीधा प्रभाव गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि RTE के तहत नामांकित बच्चों का डेटा कई बार जांच के दौरान शून्य (0) दिखा दिया जाता है, जबकि वे बच्चे वर्षों से विद्यालय में नियमित रूप से अध्ययनरत हैं। जिला स्तर पर इसका समाधान नहीं हो पाने से विद्यालय मानसिक एवं आर्थिक प्रताड़ना झेल रहे हैं।
मुख्य समस्याएँ एवं मांगें
• U-DISE पोर्टल पर सभी कक्षाओं के बच्चों का नाम जोड़ने, सुधार (नाम, जन्मतिथि) और डबल प्रमोशन की सुविधा विद्यालय स्तर पर दी जाए।
• APAAR ID के बिना CBSE पंजीकरण लगभग असंभव हो गया है, ऐसे में स्कूल को डेटा सुधार का अधिकार मिलना अनिवार्य है।
• ज्ञानदीप पोर्टल में गंभीर तकनीकी खामियाँ हैं, बच्चों का पूरा विवरण दिखाई नहीं देता, जिससे भुगतान रुक रहा है।
• 2019–2024 के RTE बच्चों को ज्ञानदीप पोर्टल पर डेटा अपडेट करने का विशेष अवसर दिया जाए।
• निजी विद्यालयों के लिए केवल U-DISE पोर्टल पर्याप्त है, E-Sambandhan पोर्टल की बाध्यता समाप्त की जाए।
• विद्यालय मान्यता/नवीनीकरण प्रक्रिया को सरल एवं तेज किया जाए तथा नए विद्यालयों के पंजीकरण की गति बढ़ाई जाए।
• बच्चों के आधार निर्माण की प्रक्रिया विद्यालय स्तर पर शुरू की जाए ताकि APAAR ID बन सके।
• RTE नामांकन में विद्यालय के समीपवर्ती बच्चों को प्राथमिकता दी जाए।
सैयद शमायल अहमद ने यह भी कहा कि “यदि समय पर RTE प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान नहीं हुआ और पोर्टल संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो निजी विद्यालयों के लिए RTE के तहत शिक्षा जारी रखना अत्यंत कठिन हो जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।”
PSACWA ने बिहार सरकार
से मांग की है कि निजी विद्यालयों को भागीदार के रूप में देखा जाए, न कि बोझ के रूप में, और शीघ्र निर्णय लेकर शिक्षा व्यवस्था को बचाया जाए।
संगठन ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा सकारात्मक पहल किए जाने पर निजी विद्यालय हर स्तर पर सहयोग के लिए तैयार हैं।












