शेरघाटी।बाँकेबाज़ार प्रखंड के सैफगंज पंचायत स्थित लोहिया स्वच्छता बिहार अभियान के तहत निर्मित अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई आज बदहाली की तस्वीर पेश कर रही है। लाखों रुपये की लागत से बना यह कचरा प्रसंस्करण केंद्र देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो चुका है और केवल गांव की शोभा बढ़ाने तक सीमित रह गया है।
सरकार की इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कचरे का संग्रहण और उसका रीसाइक्लिंग कर स्वच्छता को बढ़ावा देना था। लेकिन सैफगंज में हालात इसके ठीक उलट नजर आ रहे हैं। इकाई के आसपास कचरे का अंबार लगा हुआ है, जबकि भवन खुद उपयोगहीन पड़ा है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण के बाद इस इकाई का उद्घाटन तो हुआ, लेकिन आज तक यहां न तो कचरा जमा किया गया और न ही किसी प्रकार का प्रसंस्करण कार्य शुरू हो पाया। स्थिति यह है कि भवन के बाहर लगा चापाकल भी अधूरा पड़ा है—बोरिंग तो है, लेकिन हैंडपंप गायब है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह इकाई कागजों में भले ही संचालित दिख रही हो, लेकिन धरातल पर पूरी तरह निष्क्रिय है। देखरेख के अभाव में भवन जर्जर हो रहा है और आसपास गंदगी का अंबार बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इस ओर न तो पंचायत प्रतिनिधियों का ध्यान है और न ही प्रखंड स्तरीय अधिकारियों की नजर पड़ रही है। लोगों का मानना है कि सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना सैफगंज पंचायत में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से इस इकाई को चालू कराने, मरम्मत कराने और नियमित संचालन सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि स्वच्छता अभियान का उद्देश्य पूरा हो सके
