भीषण गर्मी में नवजात को रखें सुरक्षित
लोटस हॉस्पिटल के एमडी, शिशु रोग विशेषज्ञ सह जेनरल फिजिशियन ने जारी की एडवाइजरी
-डिहाइड्रेशन से बचाव जरूरी
वजीरगंज | गया सहित बिहार के सभी जिलों में गर्मी का पारा 42°C पार कर चुका है और ऐसे मौसम में सबसे ज्यादा खतरा नवजात शिशुओं को होता है। लोटस हॉस्पिटल के एमडी, शिशु रोग विशेषज्ञ सह जेनरल फिजिशियन डॉ. जय प्रकाश भारती ने अभिभावकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है।
डॉ. भारती ने कहा क़ि नवजात का तापमान नियंत्रित करने वाला सिस्टम कमजोर होता है। तेज गर्मी में डिहाइड्रेशन, लू, घमौरी और डायरिया के केस तेजी से बढ़ते हैं। थोड़ी सी लापरवाही बच्चे की जान पर भारी पड़ सकती है।
डॉ. जयप्रकाश भारती की जरूरी सलाह:
सिर्फ मां का दूध, हर 2 घंटे पर:
6 माह तक के बच्चे को पानी, घुट्टी, शहद कुछ न दें। गर्मी में डीहाइड्रेशन से बचाने के लिए दिन-रात हर 2 घंटे पर स्तनपान कराएं। मां खुद 4 लीटर पानी पिए।
कमरा रखें 24-26°C:
AC 26°C पर चलाएं, हवा सीधी बच्चे पर न पड़े। कूलर-पंखा चल सकता है, पर कमरा हवादार हो। बच्चे को दिनभर बंद कमरे में न रखें।
कपड़े केवल सूती : बच्चे को सिर्फ ढीला सूती झबला-नैपी पहनाएं। टोपी, मोजा, दस्ताना गर्मी में न पहनाएं। सिंथेटिक कपड़े व पाउडर से घमौरी बढ़ती है।
नहलाएं पर ध्यान से:
गुनगुने पानी से दिन में एक बार नहलाएं। साबुन रोज न लगाएं। नहाने के बाद तौलिए से थपथपाकर सुखाएं। रैशेज पर नारियल तेल लगाएं।
डायपर कम से कम: दिन में सूती लंगोट इस्तेमाल करें। डायपर सिर्फ 3-4 घंटे रात में। गीला नैपी तुरंत बदलें वरना इंफेक्शन होगा।
धूप में न निकालें: सुबह 10 से शाम 5 बजे तक बच्चे को घर से बाहर न ले जाएं। जरूरी हो तो सूती कपड़े से ढककर ले जाएं। भीड़-भाड़ से बचाएं।
खतरे के संकेत पहचानें: बच्चा दूध न पिए, सुस्त हो, 6 घंटे पेशाब न करे, रोने पर आंसू न आए, बुखार 100°F से ऊपर हो या सांस तेज चले तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
क्या न करें-
डॉ. जय प्रकाश भारती ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में नवजात को ग्लूकोज का पानी, ग्राइप वाटर या जनम घुट्टी देने का चलन है, जो खतरनाक है। मां के दूध के अलावा कुछ न दें। गले में काला धागा टाइट न बांधें और सरसों तेल से मालिश गर्मी में न करें–नारियल तेल बेहतर है।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में नजदीकी अस्पताल या आशा कार्यकर्ता से संपर्क करें।
सावधानी ही बचाव है। मां का दूध, सही तापमान और साफ-सफाई से नवजात को गर्मी में सुरक्षित रख सकते हैं।
