गयाजी।प्राचीन काल से लेकर अबतक देश की अर्थव्यवस्था कृषि पर ही निर्भर रही है और वर्तमान में भी देश की आबादी के 74 से 76 प्रतिशत लोग कृषि से जुड़े हुए हैं | कृषि में नवाचार एवं एकीकृत कृषि प्रणाली से अर्थव्यस्था को मजबूत करने के साथ हम विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं | उक्त वक्तव्य श्री विजय कुमार सिन्हा, माननीय उपमुख्यमंत्री-सह- कृषि मंत्री, बिहार ने दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) परिसर में वृहस्पतिवार (31 जुलाई, 2025) को नवनिर्मित उद्यान भवन एवं धन्वन्तरि आरोग्य वाटिका के उद्घाटन समारोह के पश्चात विवेकानंद सभागार में कृषि संकाय के छात्रों के लिए आयोजित अविविन्यास कार्यक्रम में दिया | अपने उद्बोधन की शुरुआत में माननीय उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक शिक्षा अनुसंधान के संकल्प के साथ इस विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है। कृषि भव्य भारत की वास्तविक तस्वीर है जिसका सामाजिक संकल्प हमने अपने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश के अमृत काल में लिया है | माननीय उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें विरासत और संस्कृति के आधार को भी समझना होगा। उन्होंने सभागार में उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए पूछा कि हमारे देश की संस्कृति का आधार क्या रहा है ? श्री सिन्हा ने कहा कि इस प्रश्न के उत्तर के बारे गहराई से सोचेंगे तो पाएंगे कि हमारी संस्कृति की नींव एग्रीकल्चर यानि कृषि पर टिकी है | अपने उद्बोधन के दौरान कृषि मंत्री ने फसल से जुड़े खरीब और रबी शब्दों जो वास्तविक तौर पर अरबी के शब्द हैं उनका हिंदी अर्थ क्रमशः शारदीय तथा वसंतिक होता है जिनका इस्तेमाल बिहार सरकार के विभागों द्वारा किया जा रहा है और इस का प्रचलन को आगे आमजनो में बढ़ाया जा रहा है । हमारे पर्व, त्यौहार, वेशभूषा, खानपान से लेकर धर्म और ज्ञान की धुरी हमारी संस्कृति पर टिकी है जो हमारी शक्ति है लेकिन हम अन्य संस्कृतियों के प्रभाव में आकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भूल गए | आज ज़रूरत इस बात कि है कि हम अपने सांस्कृतिक विरासत को ढूंढ़कर उनपर पुनः अपनाने की कोशिश करें इसी से देश का विकास होगा और भारत 2047 में ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल कर विश्वगुरु बन सकता है | माननीय मंत्री ने कहा कि आज केवल पारंपरिक खेती से किसानों और ग्रामीण युवाओं की आमदनी में संतोषजनक वृद्धि संभव नहीं, इसके लिए एकीकृत कृषि प्रणाली को अपनाने की आवश्यकता है जिस दिशा में यह विश्वविद्यालय सक्रिय भूमिका निभा रहा | बीएससी एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम के अंतर्गत छात्रों को हॉर्टिकल्चर, मशरुम फार्मिंग, मधुमक्खी पालन, गोपालन, धान रोपण आदि के साथ कृषि एवं पशुधन से सम्बंधित आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाता है जो काफी सराहनीय है | इस अवसर पर माननीय उपमुख्यमंत्री ने कुलपति प्रो के. एन. सिंह के साथ पौधरोपण किया और गौशाला का भ्रमण करते हुए गायों को चारा भी खिलाया |
अभिविन्यास कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित टेकारी के विधायक डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि विश्वविद्यालय उनके विधानसभा छेत्र में स्थित है और यह इस छेत्र के विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है | विधायक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि सीयूएसबी कैंपस में केंद्रीय विद्यालय (सेंट्रल स्कूल) की स्थापना के लिए काफी लम्बे समय से प्रयास कर रहे हैं और उन्होंने आशा जताई कि कुलपति प्रो के. एन. सिंह के सहयोग से इसकी स्थापना जल्द-से-जल्द होगी | इससे पहले कार्यक्रम के औपचारिक उद्घाटन के पश्चात स्वागत भाषण में अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति, प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि “ऋषि और कृषि” इस देश की प्राथमिकता रही है। कुलपति महोदय ने कहा कि सीयूएसबी का ध्यय ‘कैंपस फॉर कम्युनिटी’ है जिसका उद्देश्य परिसर के विद्यार्थियों के साथ आसपास के गांवों के साथ समस्त मगध छेत्र के किसानों एवं युवाओं के कौशल को विकसित करना है और सीयूएसबी इस दायित्व है छेत्र की आवश्यकता पर आधारित पाठ्यक्रम संचालित करके निभा रहा है | आसपास के गांव के लोग भी विश्वविद्यालय परिसर में आकर कृषि और पशुधन से संबंधी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं | कार्यक्रम का समन्वयन एवं संचालन कृषि विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हेमंत कुमार सिंह ने स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर एंड डेवलपमेंट के डीन प्रो. अवनीश प्रकाश सिंह के मार्गदर्शन में किया।
