इतिहास के पन्नों में दर्ज एक नई शुरुआत…
पटना यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक इतिहास में अमानुल्लाह अंसारी का नाम एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में याद किया जाएगा। विश्वविद्यालय की राजनीति में विविधता, प्रतिनिधित्व और बराबरी की आवाज़ को मज़बूत करते हुए उन्होंने बतौर पहले मुस्लिम काउंसलर जीत हासिल कर एक नया अध्याय जोड़ा।
यह केवल एक व्यक्तिगत विजय नहीं, बल्कि समावेशी लोकतंत्र की जीत है।विश्वविद्यालय परिसर में सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता को नई पहचान मिली।युवाओं को संदेश गया कि प्रतिभा, मेहनत और प्रतिबद्धता ही असली पहचान है न कि जाति या धर्म।
अमानुल्लाह अंसारी की जीत बताती है कि आज का छात्र वर्ग मुद्दों पर वोट करता है पारदर्शिता,छात्र हित,शैक्षणिक वातावरण में सुधार समान अवसर,यह परिणाम इस बात का संकेत है कि पटना यूनिवर्सिटी का छात्र समुदाय सकारात्मक बदलाव के पक्ष में खड़ा है।
यह उपलब्धि केवल कैंपस तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को भी संदेश देती है कि शिक्षा के मंदिरों में सद्भाव, समानता और नेतृत्व साथ-साथ चल सकते हैं
अमानुल्लाह अंसारी की यह जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।यह साबित करती है कि जब युवा जागरूक होते हैं, तो इतिहास बदलता है और बदलाव की शुरुआत विश्वविद्यालय से ही होती है।












