Thursday, March 12, 2026
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हिन्दी-मगही साहित्यिक मंच की मासिक बैठक में छठ एवं चुनावी गीतों की रही धूम

वजीरगंज। हिन्दी-मगही साहित्यिक मंच की मासिक बैठक रविवार को आयोजित की गई, जिसमें मंच सदस्यों व आमंत्रित लोगों ने चुनाव तथा छठ गीतों पर खूब  तालियां बटोरी। मंच सदस्य पूर्णेन्दू कुमार ने मगही छठ गीत ‘तोहरे अरगिया से भरल पूरल बगिया सुरूज देवता.. संझिया के बेरिया में नहा के परवइतिया सुरुज  देवता… देहो सांझ के अरगिया सुरूज देवता——, 8 वर्षीय परी कुमारी ने काच रे बांस के बहंगिया.. बहंगी लचकत जाय—– गीत गया, जिस पर श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर खूब तालियां बजायी। वहीं महेश कुमार सुमन ने चुनावी व्यंग  कविता  ‘अब तो अजीब-अजीब बातें होने लगे हैं… जो खुद भ्रष्टाचार में लीन हैं वो भी भ्रष्टाचार मिटाने की बात करने लगे हैं—– आवेत हको चुनाव होश में रहीह… नेता अइतो मंत्री आईतो झुठमुठ तोहरा खूब समझईतो——– आदि कविताओं ने भी खूब  वाहवाही बटोरी। बैठक के अंत में मंच का वार्षिकोत्सव मनाने की रणनीति पर चर्चा की गई। मौके पर मंच संरक्षक कृष्णचन्द्र चौधरी, अध्यक्ष पंकज कुमार, सुरेन्द्र प्रसाद, क्रांतिविर शर्मा, सेवानिवृत शिक्षक, रामचन्द्र दास, अखिलेश कुमार, अमित कुमार, ललन कुमार, प्रभाकर कुमार एवं अन्य ने भी कविताएं पढ़ी।

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