Saturday, March 14, 2026
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भारत के परंपरागत खेलों का टूर्नामेंट आयोजित करने वाला सीयूएसबी संभवत पहली सेंट्रल यूनिवर्सिटी, कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह

गयाजी।आज के आधुनिक दौर में देश का परिदृश्य बड़ी तेज़ी से बदल रहा है जिसकी वजह से भारत के प्राचीन परंपरागत खेल भी विलुप्त होते जा रहे हैं | भारत के परंपरागत खेलों की कई विशेषताएं रही हैं जिसमें नगण्य लागत के साथ – साथ स्वस्थ शारीरिक एवं मानसिक विकास आदि प्रमुख विशेषताएं हैं | हमें अपने प्राचीन परंपराओं विशेषकर खेलों के पुनःउद्द्धार करने की आवश्यकता है जिससे आने वाली पीढ़ी स्वस्थ्य रहने के साथ – साथ अपने सांस्कृतिक मूल्यों को न भूलें | दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) अपने अकादमिक उत्कृष्टता के ध्येय के साथ – साथ देश की प्राचीन परंपराओं को संजों कर रखने के लिए कृतज्ञ है और इसी भाव – भावना से विश्वविद्यालय परिसर में इस अकादमिक सत्र से ‘भारतीय खेल पखवाड़ा’, 15-दिवसीय  ‘भारत के परंपरागत खेलों का टूर्नामेंट’ आयोजित करने जा रहा है | उक्त वक्तव्य सीयूएसबी के कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘भारत के परंपरागत खेलों का टूर्नामेंट’ का मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन करते हुए दिया | कुलपति महोदय ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में पठन – पाठन के साथ – साथ खेलों को विशेष रूप से तरजीह दी गई और इसी दिशा में सीयूएसबी ने यह कदम उठाया है | प्रो. सिंह ने पखवाड़ा का शुभारंभ करते हुए स्वयं विद्यार्थियों द्वारा उत्साहपूर्वक खेले जा रहे खेलों क्रमशः रस्साकशी, पिट्ठू, पुच्ची – पुच्ची, पतंगबाज़ी, गिट्टे, गिल्ली डंडा, लट्टू कताई, मटकाफोड़, कांच कौड़ी, लंगड़ी, कंचा, बिच्छू पानी, कोड़ा जमाल के साथ भारत की समृद्ध खेल संस्कृति को दर्शाने वाले कई अन्य पारंपरिक खेलों का जायज़ा लिया  | इस अवसर पर कुलपति महोदय के साथ कुलसचिव प्रो नरेंद्र कुमार राणा, वित्तधिकारी श्रीमती रश्मि त्रिपाठी, परीक्षा नियंत्रक डॉ शान्तिगोपाल पाइन, डीएसडब्ल्यू प्रो प्रमोद कुमार मिश्रा, प्रॉक्टर प्रो प्रणव कुमार, खेलकूद समिति के अध्यक्ष प्रो प्रवीण कुमार, सहायक निदेशक शारीरिक शिक्षा डॉ. जितेंद्र प्रताप सिंह के साथ खेलकूद समिति के अन्य सदस्य, प्राध्यापकगण, अधिकारीगण, कर्मचारी एवं छात्र बड़ी संख्या में मौजूद थे | इससे पहले कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह ने 79वें स्वतंत्रता दिवस समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज को फहरा कर किया एवं एनसीसी कैडेट्स ने परेड के साथ झंडे को सलामी दी | उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत में भारतीय स्वंत्रता संग्राम में शामिल स्वतंत्रता सेनानीयों को नमन करते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, महर्षि अरविंद, मंगल पांडेय, अशफाकुल्लाह खान आदि के बहुमूल्य योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रृद्धांजलि दी | कुलपति महोदय ने कहा कि देश की आज़ादी से अब तक हमने एक लम्बा सफर तय किया है और देश की शक्ति व संप्रभुता में देशवासियों का योगदान रहा है | समारोह स्थल में मौजदू लोगों को विशेषतौर पर सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा की देश की ताकत दिल्ली या लुट्येन ज़ोन में नहीं है बल्कि भारत की 142 करोड़ जनता में है | अगर समस्त देशवासियों ने राष्ट्रनिर्माण में अपना योगदान दिया आने वाले समय में भारत 5 ट्रिलियन की इकॉनमी के साथ विश्वगुरु बन सकता है ऐसा मेरा अटूट विश्वास है | कुलपति महोदय ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के तेज़ी से हो रहे विकास के सफर को साझा करने के साथ – साथ ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए देशवासियों विशेषकर युवाओं के योगदान चर्चा की | उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा हासिल हालिया उपलब्धियों के साथ भविष्य की योजनाओं के बारे में भी उपस्थित लोगों को अवगत कराया | कुलपति महोदय के भाषण के पश्चात सीयूएसबी के छात्र – छात्राओं ने मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की जिसने सबमे देशभक्ति की भावना भर दिया | सीयूएसबी के सांस्कृतिक समिति की अध्यक्ष प्रो. उषा तिवारी के नेतृत्व में डॉ. अनिंद्य देब, डॉ. पूनम कुमारी, डॉ. तरुण त्यागी, लेफ्टिनेंट (डॉ.) प्रज्ञा गुप्ता के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. अमृता श्रीवास्तव ने किया |

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