शाश्वत गुरु के रूप में शिव की प्रासंगिकता पर हुआ मंथन
वजीरगंज।वजीरगंज प्रखंड के पुनावां निवासी गुरु बहना रानी जी के द्वारा सोमवार को ‘शिव आज भी गुरु हैं’ विषय पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने भगवान शिव को आदि गुरु, जगतगुरु और शाश्वत मार्गदर्शक के रूप में स्थापित करते हुए वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य वक्ता भाई सुधीर जी ने कहा कि शिव केवल संहार के देवता नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के पहले गुरु हैं। सप्तऋषियों को ज्ञान देने से लेकर आज के युग तक, शिव का मौन उपदेश हर साधक के लिए पथ-प्रदर्शक है। उन्होंने बताया कि शिव का डमरू नाद, ध्यानस्थ मुद्रा और त्रिनेत्र—तीनों ही ज्ञान, विवेक और अंतर्दृष्टि के प्रतीक हैं।
परिचर्चा में यह बात उभरकर आई कि आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और दिशाहीनता में शिव का वैराग्य और समभाव का दर्शन मनुष्य को संतुलन सिखाता है। यही सरलता आज के युवाओं को आध्यात्म से जोड़ सकती है। नशा, अवसाद और भटकाव से बचने के लिए शिव के संयम और साधना के आदर्श को अपनाने का आह्वान किया गया।
परिचर्चा के बीच शिव स्तुति, रुद्राष्टकम पाठ और ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ पर आधारित भजन प्रस्तुतियों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक रूप से _“गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः”_ मंत्र का उच्चारण कर शिव को गुरु रूप में नमन किया गया।
आयोजन समिति ने बताया कि ‘शिव गुरु’ की परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जिले भर में ऐसी परिचर्चाएं आगे भी आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध नागरिक, महिलाएं एवं बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए।
इस मौके पर गुरु बहना सीमा जी ,सरोज दीदी ,मुन्नी गुरु बहना , जानकी बहना ,
सुदाम जी
रेखा दीदी आदि मौजूद थी।
