गयाजी।सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (सीयूएसबी) के इंस्टिट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की पाँचवीं वर्षगांठ के अवसर पर एक विशेष अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम में दो महत्वपूर्ण विषयों पर क्रमशः “शिक्षा क्षेत्र में सुधारों में सरकार की भूमिका: मलावी का दृष्टिकोण” “शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार को प्रोत्साहन देने में सरकार की भूमिका: क्यूबेक का दृष्टिकोण” पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए गए | जन सम्पर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईसी के अध्यक्ष प्रो. वेंटकेश सिंह ने की और उद्घाटन प्रो. प्रवीण कुमार (समन्वयक, जन नीति एवं जनमत प्रकोष्ठ) के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम में डॉ. कुमारी नीतू, विधि विभाग, सीयूएसबी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सक्रियता से भाग लिया | ऑनलाइन माध्यम से आयोजित कार्यक्रम सीयूएसबी के प्राध्यापकों, शोधार्थियों, छात्रों के साथ अकादमिक छेत्र से सम्बंधित लोग देश और दुनिया से जुड़े |
मुख्य वक्ता डॉ. मॉरीन एल. कपांगा (शिक्षाविद्, मलावी) ने मलावी की शिक्षा प्रणाली के सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे वहाँ सरकार ने 1964 से अब तक शिक्षा में सुधार हेतु प्रतिबद्ध प्रयास किए हैं। उन्होंने मलावी की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं, नीतिगत हस्तक्षेपों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी की भूमिका पर भी गहन चर्चा की। उनके विचारों ने यह स्पष्ट किया कि शिक्षा सुधार एक दीर्घकालिक, समन्वित प्रयास है। दूसरी वक्ता सुश्री ज़ाह्या इदरीसी, यूनिवर्सिटी ऑफ शेर्ब्रूक, क्यूबेक (कनाडा) ने क्यूबेक में शिक्षा को नवाचार से जोड़ने की नीति, विशेष रूप से प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग (पीबीएल) मॉडल का विस्तृत विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि कैसे कनाडा में उच्च शिक्षा संस्थान, उद्योगों के साथ मिलकर छात्रों को समस्याओं के व्यावहारिक समाधान से जोड़ते हैं, जिससे शिक्षा और रोजगार के बीच मजबूत संबंध बनता है। उन्होंने भारत के लिए तुलनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए सुझाव दिए कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मॉडल से प्रेरणा ली जा सकती है।
आईआईसी के छात्र समन्वय टीम के सदस्य आरोही, कुमारी प्रज्ञा मिश्रा, प्रतिभा, प्रियांशु कांत, अभिषेक चंदन और आरुष ने ऑनलाइन माध्यम में कार्यक्रम के संचालन में सशक्त भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया जिसमें सभी वक्ताओं, संयोजकों, संकाय सदस्यों, तकनीकी सहयोगियों, और प्रतिभागियों का आभार प्रकट किया गया। संगोष्ठी ने एनईपी 2020 के मूल्यों को वैश्विक अनुभवों से जोड़ते हुए विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त मंच प्रदान किया।












