गयाजी।माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश आज़ादी के 100 वर्ष पुरे होने पर ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति के तरफ अग्रसर है | विकसित भारत के लक्ष्य के प्राप्ति के लिए देश के हर नागरिक तथा हर वर्ग की भूमिका अहम है | अगर विश्वविद्यालय स्तर पर बात करें तो यहाँ कार्यरत कर्मयोगियों कार्य के प्रति सत्य निष्ठा के साथ – साथ समर्पण से ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में अहम योगदान दे सकते हैं | उक्त वक्तव्य दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने राष्ट्रीय कर्मयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में कही | मुख्य अतिथि के रूप में प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन करते हुए कुलपति महोदय ने अपने संबोधन के शुरुआत में सभी प्रतिभागियों को बधाई और शुभकामनाएं दी | अपने वक्तव्य की शुरुआत में कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि देश की आज़ादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर माननीय प्रधानमंत्री ने अगले 25 वर्षों में, यानी 2047 में, एक विकसित भारत सुनिश्चित करने के लिए ‘पंच प्रण’ (पाँच संकल्प) की बात कही थी | पंच प्रणों में विकसित भारत का संकल्प, औपनिवेशिक मानसिकता का हर निशान मिटाना, अपनी विरासत पर गर्व करना, हमारी एकता की ताकत एवं नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना शामिल हैं | हम जब विकसित भारत की बात करते हैं तो विकास का मतलब होता है कि देश के हर नागरिक को एक सम्मानजनक एवं गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना है | विकसित भारत के साथ – साथ इस महान देश में विश्वगुरु बनने के सारे गुण मौजूद हैं | वैश्विक स्तर पर भारत को सबकॉन्टिनेंट कहा जाता है इसकी वजह यहाँ का भौगोलिक विस्तार, जलवायु, संस्कृति, रहन-सहन आदि में विविधताएं हैं | अकेले गंगा – यमुना के खेतिहर मैदानों में ही इतनी क्षमता है कि वे विश्व की एक बड़ी आबादी का पेट भर सकता है | वहीं जो लोग सरकारी या गैर-सरकारी संस्थानों में कार्यरत हैं वे अगर कार्य में अपना योगदान सत (100 %) प्रतिशत दें तो देश विकसित होने के साथ विश्वगुरु बन सकता है | अंत में उन्होंने सभागार में मौजूद कर्मयोगियों से आह्वान किया कि वे टीम वर्क की भावना से काम करें जिससे सीयूएसबी को राष्ट्रिय – अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हो | काम के प्रति समर्पण से सीयूएसबी राष्ट्रीय निर्माण और विकसित भारत में एक बड़ी भूमिका निभा सकता है |
जन सम्पर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशानुसार सीयूएसबी में राष्ट्रीय कर्मयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है | प्रथम दिन औपचारिक उद्घाटन के पश्चात स्वागत भाषण में श्री प्रतीश कुमार दास ने बताया कि राष्ट्रीय कर्मयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन तीन चरणों में क्रमशः 27 – 29 अगस्त, 02 – 04 सितम्बर एवं 08 – 10 दिसंबर 2025 के दौरान नौ (09) एकदिवसीय पूर्णकालिक सत्रों में किया जाएगा | उन्होंने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन आईगोट (iGOT) कर्मयोगी प्लेटफार्म के माध्यम से किया जाएगा जिसमें शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक सदस्यों को इस प्लेटफार्म पर ऑनबोर्ड किया गया है | राष्ट्रीय कर्मयोगी प्रशिक्षण का उद्देश्य विभिन्न सरकारी संस्थानों में कार्यरत कर्मयोगियों को साझा राष्ट्रीय लक्ष्यों और प्राथमिकताओं की दिशा में सहयोगात्मक, संयुक्त प्रयास को प्रोत्साहित कर उन्हें सशक्त बनाना है | उपकुलसचिव श्री प्रतीश कुमार दास, श्री कुमार कौशल के साथ श्रीमती रेणु (सहायक प्राध्यापक, कॉमर्स) मास्टर ट्रेनर के रूप में अलग – अलग सत्रों में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देंगे।












