Friday, May 22, 2026
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सड़क दुर्घटना में घायल महिला की इलाज के दौरान मौत, इकलौते बेटे पर टूटा दुखों का पहाड़

तेतारपुर-खिजरसराय मार्ग पर सड़क हादसा

खिजरसराय।तेतारपुर-खिजरसराय मुख्य मार्ग पर बीते रविवार को हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल महिला ने आखिरकार मंगलवार को दम तोड़ दिया। मृतका की पहचान बकथर गांव निवासी कारू चौधरी की पत्नी फुलवा देवी के रूप में हुई है। मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल, गया में इलाज के दौरान उन्होंने आखिरी सांस ली। इस घटना के बाद से पूरे गांव में शोक की लहर है, वहीं मृतका के 23 वर्षीय इकलौते पुत्र रंजन चौधरी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
पिकअप की टक्कर से आई थी गंभीर चोटें
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार को तेतारपुर-खिजरसराय रोड पर एक अनियंत्रित पिकअप वाहन ने फुलवा देवी को जोरदार टक्कर मार दी थी। इस हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। दुर्घटना के तुरंत बाद उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए गया के अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल (ANMMCH) में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद दो दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद आखिरकार मंगलवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।
नियति की क्रूर मार: 20 साल पहले पिता खोए, अब मां का साया भी उठा
इस हादसे ने एक बार फिर नियति की क्रूरता को सामने ला दिया है। पीड़ित परिवार की पृष्ठभूमि बेहद भावुक करने वाली है। बताया जाता है कि आज से करीब 20 वर्ष पहले मृतका के पति कारू चौधरी अचानक अपना मानसिक संतुलन खो बैठे थे और घर से कहीं लापता हो गए थे। काफी खोजबीन के बाद भी उनका कुछ पता नहीं चल सका।
पति के लापता होने के बाद फुलवा देवी ने बेहद तंगहाली और संघर्षों के बीच अपने इकलौते बेटे रंजन और तीन बेटियों का पालन-पोषण किया। उन्होंने अपनी तीनों बेटियों (एक बड़ी और दो छोटी) की शादी कराकर उन्हें विदा किया। बचपन में ही पिता का साथ छूट जाने के बाद रंजन के लिए उसकी मां ही उसका एकमात्र सहारा और पूरी दुनिया थी।
महज 23 साल की उम्र में रंजन पर आया पूरे परिवार का बोझ
महज 23 वर्ष की उम्र में रंजन चौधरी के सिर से मां का साया भी हमेशा के लिए उठ गया है। बचपन में पिता की गुमशुदगी का दंश झेलने वाले रंजन के ऊपर अब मां की मौत वज्रपात की तरह हुई है। रंजन खुद भी एक छोटे बच्चे का पिता है। इतनी कम उम्र में माता-पिता दोनों का साया सिर से उठ जाने और अब अपनी पत्नी, बच्चे व पूरे परिवार की जिम्मेदारी का बोझ रंजन के कंधों पर आ गया है।
इस हृदयविदारक घटना के बाद बकथर गांव के लोग भी स्तब्ध हैं। रंजन की विवाहित बहनें भी मां के अचानक चले जाने से गहरे सदमे में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रंजन पर जो बीती है, उसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाती है। गांव के प्रबुद्ध जनों और रिश्तेदारों ने पीड़ित युवक को ढांढस बंधाया और प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा देने की पुरजोर मांग की है।

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