बेलागंज।प्रखंड की एरकी पंचायत स्थित पंडित यदुनंदन शर्मा की कर्मस्थली नेयामतपुर आश्रम एक बार फिर से चर्चा में है। चर्चा इस बात को लेकर पंडित यदुनंदन महोत्सव को लेकर आश्रम से जुड़े ट्रस्ट ने एक पहल की थी। राज्य सरकार के कला-संस्कृति विभाग को पत्र लिखा था। इस पर विभाग की ओर से मिले जवाब में पंडित यदुनंदन शर्मा सेवा आश्रम ट्रस्ट को बताया गया है कि महोत्सव को लेकर गयाजी के डीएम से प्रतिवेदन मांगा गया है। मालूम हो कि पंडित यदुनंदन शर्मा मगध इलाके के ही नहीं, देश भर के बड़े किसान नेता और स्वतंत्रता सेनानियों में शुमार रहे हैं। इनको लेकर यदुनंदन महोत्सव की मांग लंबे समय से की जा रही है। ऐसा करके नयी पीढ़ी को इनकी जीवनी से रू-ब-रू करवाया जा सकता है। नेयामतपुर आश्रम देश के बड़े किसान आंदोलन का केंद्र हुआ करता था। रेवड़ा सत्याग्रह हो, शहबाजपुर सत्याग्रह हो या शंडा(टिकारी) किसान आंदोलन। सबका सफल नेतृत्व पंडित यदुनंदन शर्मा ने इसी नेयामतपुर आश्रम से किया। इन सभी आंदोलनों में न केवल किसानों की जीत हुई थी, बल्कि अंग्रेजों और जमींदारों को पीछे हटना पड़ा था। इन आंदोलनों के बाद से किसानों से जबरन वसूला जानेवाला टैक्स स्थाई तौर पर बंद हो गया था। पंडित यदुनंदन शर्मा सेवा आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष रविशंकर ने बताया कि इनका आश्रम तो अब तक उपेक्षित रहा ही है। यदि यदुनंदन महोत्सव जैसा कार्यक्रम भी हो जाये, तब इनका नाम बचेगा। अन्यथा आनेवाले समय में लोग इन्हें भूल जाएंगे। जबकि अंग्रेजों से लड़ाई लड़ने से लेकर आजादी के बाद जमींदारी उन्मूलन तक में इन्होंने महती भूमिका निभाई। आजीवन किसानों के लिए लड़ते रहे। पिछले दिनों बिहार शिक्षा परियोजना की पत्रिका में भी इनकी जीवनी का संक्षिप्त अंश प्रकाशित हुआ था। ट्रस्ट ने जिलाधिकारी गयाजी से आग्रह किया है कि कला-संस्कृति विभाग की ओर से मांगी गयी रिपोर्ट को इस तरह भेजा जाये कि यहां पंडित यदुनंदन महोत्सव शुरू हो सके।






