गयाजी।मगध विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की बैठक दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के सभागार में सम्पन्न हुई, जिसमें विश्वविद्यालय के भविष्य को नई दिशा देने वाले कई ऐतिहासिक प्रस्तावों पर चर्चा की गई। यह बैठक न केवल शिक्षण पद्धति में परिवर्तन की शुरुआत है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संतुलन की एक ठोस कोशिश भी मानी जा रही है। अब विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को इंटर्नशिप के स्थान पर भारतीय ज्ञान प्रणाली का 4 क्रेडिट वाला वैकल्पिक पाठ्यक्रम उपलब्ध कराया जाएगा। यह पहल शिक्षा को न केवल रोजगारोन्मुखी बनाएगी, बल्कि विद्यार्थियों को भारत की बौद्धिक विरासत से भी सीधे जोड़ेगी। यह प्रयास भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक संदर्भों में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।वहीं आठवें सेमेस्टर में शोध कार्य (12 क्रेडिट) के स्थान पर अब विद्यार्थी 4-4 क्रेडिट के तीन सिद्धांत पाठ्यक्रमों का चयन कर सकेंगे, जिससे विषयगत समझ गहराई पाएगी और छात्रों को अपनी रुचि के अनुरूप ज्ञान अर्जन का विकल्प मिलेगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सत्र 2019-21 से स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों का नया प्रारूप चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के तहत लागू होगा, जिससे छात्रों को पाठ्यक्रम चयन में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी और उनकी अकादमिक यात्रा अधिक लचीली तथा समृद्ध हो सकेगी। तकनीकी शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय मानकों से जोड़ते हुए कंप्यूटर साइंस में पीएचडी डिग्री के नामकरण को लेकर भी गंभीर विमर्श हुआ, जिससे शोधार्थियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता और अवसर प्राप्त हो सकें। इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर एसपी शाही ने कहा कि मगध विश्वविद्यालय की यह बैठक केवल पाठ्यक्रमों में बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक विचारशील आंदोलन है। हम शिक्षा को नौकरी की तैयारी भर नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की संकल्पना से जोड़ना चाहते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़कर हम उस ‘रामराज्य’ की ओर अग्रसर हैं, जहाँ ज्ञान न केवल जीवनोपयोगी होगा, बल्कि संस्कारमूलक भी। यह शैक्षणिक क्रांति मगध विश्वविद्यालय को एक नई पहचान देगी — परंपरा में नवाचार और नवाचार में परंपरा का अद्भुत संतुलन। बैठक में लिए गए निर्णयों से यह स्पष्ट है कि मगध विश्वविद्यालय अब शिक्षा के क्षेत्र में केवल अनुकरण नहीं, अपितु नवाचार का पथप्रदर्शक बनने की ओर अग्रसर है। अंत में कुलसचिव डॉ विनोद कुमार मंगलम ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।












