Saturday, December 13, 2025
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सीयूएसबी में नवाचार और निवेश की दिशा विषय पर आयोजित संगोष्ठी में स्टार्टअप पर परिचर्चा

गयाजी।दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) द्वारा “एंजल इन्वेस्टमेंट और स्टार्टअप” विषय आयोजित संगोष्ठी में विशषज्ञों ने स्टार्टअप से जुड़े विभिन्न आयामों पर परिचर्चा की। कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित इस संगोष्ठी में  मुख्य वक्ता के रूप में स्टार्टअप मेंटर और मिथिला एंजल नेटवर्क के फाउंडर श्री अरविंद झा शामिल हुए | जन सम्पर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत के पश्चात संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे आईआईसी के अध्यक्ष प्रो. वेंकटेश सिंह (विभागाध्यक्ष, भौतिकी) ने अपने स्वागत भाषण में बदलते समय के साथ-साथ बढ़ती उद्यमिता और उसमें छात्रों की भूमिका को रेखांकित किया। आगे मुख्य अतिथि श्री अरविंद झा ने संगोष्ठी में शामिल छात्रों और नवाचार में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों को एंजल निवेश की प्रक्रिया, स्टार्टअप चयन के मानदंड और निवेश के आधुनिक तरीकों से अवगत कराया।

श्री झा ने सरल शब्दों में स्पष्ट किया कि एंजल इन्वेस्टमेंट, आरंभिक वित्तीय सहयोग है, जो कोई अनुभवी निवेशक किसी संभावनाशील स्टार्टअप को देता है, जिसके बदले कंपनी की इक्विटी या शेयर प्राप्त करता है। उन्होंने  एंजल   इन्वेस्टर बनने की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों – बाजार की समझ, स्टार्टअप का चयन, टीम से संवाद और कानूनी औपचारिकताओं के बारे में विस्तार से बताया। श्री झा ने यह भी बताया कि आज के समय में स्टार्टअप केवल व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि नवाचार, रोजगार सृजन और सामाजिक समस्याओं के समाधान का बड़ा माध्यम बन चुके हैं।

स्टार्टअप में निवेश तय करने के सवाल पर श्री झा ने ‘3T मॉडल’ (टीम, ट्रैक्शन, टेक्नोलॉजी/टाइमिंग) की चर्चा की। उन्होंने बताया कि किसी भी निवेश के निर्णय में सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर टीम होती है, जिसमें अनुभव, संतुलन और सहयोग की भावना जरूरी है। इसके अलावा, बाजार में उत्पाद की मांग (ट्रैक्शन) और तकनीक या समय की प्रासंगिकता भी महत्व रखती है। श्री झा ने  एंजल   इन्वेस्टमेंट शुरू करने के लिए एंजलिस्ट (AngelList), लेटसवेन्चर (LetsVenture) जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ने और स्टार्टअप पिच इवेंट्स, नेटवर्किंग मीटिंग में भाग लेने की सलाह दी।उन्होंने छात्रों को अपने आइडिया को निरंतर परखने, छोटी शुरुआत के साथ स्केलेबिलिटी पर ध्यान देने, मेंटरशिप लेने, फीडबैक का सम्मान करने और वित्तीय व कानूनी ढांचे की समझ विकसित करने की महत्वपूर्ण सलाह दी। प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने निवेश में जोखिम प्रबंधन, सोशल स्टार्टअप्स में निवेश की संभावनाएं, और न्यूनतम पूंजी जैसे विषयों पर अपनी जिज्ञासा प्रकट की, जिसका वक्ता ने व्यावहारिक उत्तर देकर समाधान किया।

कार्यक्रम का समापन डॉ. लखविंदर सिंह (फैकल्टी समन्वयक, आईआईसी) के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता और आयोजन टीम का आभार प्रकट करते हुए छात्रों से विचारों को व्यवहार में उतारने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समन्वयन वैष्णवी, शालिनी एवं स्टार्टअप समिति के अन्य सदस्यों द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।

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