पटना।माले महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने प्रख्यात पत्रकार, लेखक और द टेलीग्राफ के संपादक संकर्षण ठाकुर के निधन पर गहरा शोक किया है. वे एक लंबी बीमारी से संघर्ष करते हुए इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन उनके विचार, लेखन और पत्रकारिता की निडर विरासत हमेशा हमारे साथ रहेगी.
संकर्षण ठाकुर का कार्य बिहार, कश्मीर और भारत के लोकतांत्रिक भविष्य को समझने के लिए एक अनमोल दस्तावेज़ है. उन्होंने सत्ता के दबावों और प्रलोभनों से परे रहकर पत्रकारिता को एक सामाजिक दायित्व की तरह निभाया. आज जब मीडिया का एक बड़ा हिस्सा सत्ता का उपकरण बन चुका है, संकर्षण ठाकुर उन गिने-चुने पत्रकारों में से थे जो सच बोलने का जोखिम उठाते रहे — साहस, संवेदना और जनपक्षधरता के साथ.
वे बिहार के सामाजिक–राजनीतिक यथार्थ के सबसे गहरे जानकारों में एक थे. उनका जाना न सिर्फ पत्रकारिता के लिए, बल्कि लोकतांत्रिक भारत के विचार के लिए भी एक गहरी क्षति है.
हम उनके परिवार, मित्रों और सहकर्मियों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट करते हैं. उनकी स्मृति और संघर्ष हमेशा हमारे आंदोलनों को प्रेरणा देंगे.












